किसी शहर में एक बूढ़ा मदारी रहता था उसके पास संपत्ति के नाम पर एक टूटी सी झोपड़ी और एक बंदर था जिसे नचा कर मिलने वाले पैसों से वह अपना पेट पालता था। वह मदारी उस बंदर को अपने बेटे की तरह प्यार करता था। उसके खाने पीने और सुविधा का पूरा खयाल रखता था। वह उससे अपने सुख दुख की बातें भी करता था, जब कभी मदारी की आंखों से आंसू बहते तो वह बंदर उसकी गोद में बैठ कर अपने हाथों से उसके आंसू पोछता था और फिर कला बाजी दिखा कर उसे हंसाने की कोषिष करता था।