स्मृतियां हमारे मन के बंद दरवाजे पर बार बार दस्तक देती हैं और ना चाहते हुए भी वह हमारे अंदर आकर घर करके बैठ जाती हैं। हम अक्सर उन्ही यादों व घटनाओं का बार बार स्मरण करने लगते हैं उनमें खोने लगते हैं फिर उन्हीं का चित्रण करने लग जाते हैं, जो पाठक को बहुत कुछ सोचने को मजबूर करता हैं। साहित्य लेखन ईष्वर का दिया सबसे बड़ा उपहार है। एक साहित्यकार समाज में हो रहे परिवर्तन, आंदोलन, अपराध, व्यवहार आदि की ओर से अपनी आंखे बंद नहीं कर सकता, वही तो है जो उसे लिखने के लिए झकझोरता है, प्रेरित करता है। यह वह यर्थात है जिसे झुठलाया नहीं जा सकता षायद इसी लिए साहित्य को समाज का दर्पण कहा गया है।